उपभोक्ता सरक्षण अधिनियम 2019 के अन्र्तगत गठित राष्ट्रीय आयोग के गठन, सरचना व क्षेत्राधिकार।

डा. लोकेश शुक्ल  कानपुर 9450125954




उपभोक्ता विवादो के निपटारा हेतु उपभोक्ता सरक्षण अधिनियम 2019 के अन्र्तगत गठित किये जाने उपभोक्ता विवाद निपटारा अधिकरणो मे राष्ट्रीय आयोग सर्वोच्च अघिकरण है। राष्ट्रीय आयोग सम्पूर्ण देश मं एक होगा ।

राष्ट्रीय आयोग का गठन धारा 54 के प्रदत्त प्रधिकारो के अन्र्तगत केन्द्रीय साकार द्वारा किया जायेगा । धारा 53(1) के अनुसार केन्द्रीय सरकार एक राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद परितोष आयोग का गठन अधिसुचना द्वारा करेगी । राष्ट्रीय आयोग की सरचना से सम्बन्धित प्रवधान अधिनियम की धारा 54 के अन्र्तगत किया गया है ।

धारा 54 के अन्र्तगत राष्ट्रीय आयोग का गठन एक अध्यक्ष तथा 4 अन्य सदस्यो से मिल कर होगा ।

राष्ट्रीय आयोग के अध्यक्ष और सदस्यो की अर्हताये (धारा 55) केन्द्रीय सरकार की अधिसूचना द्वारा राष्ट्रीय आयोग के अध्यक्ष और सदस्यो की अर्हताओ, नियुक्ति, पद के निबन्धन, वेतन और भत्ते, पद त्याग, हटाया जाना और सेवा के अन्य निबन्धनो और र्शतो का उपबन्ध करने के लिये नियम बना सकेगे ।

परन्तु राष्ट्रीय आयोग के अध्यक्ष और सदस्य ऐसी अवधि के लिये पद धरण करेगे जो केन्द्रीय साकार द्वारा बनाये गये नियमो मे विनिर्दिष्ट किये जाये किन्तु ऐसी तारीख से पांच वर्ष से अनाधिक जिसको वह अपना पद ग्रहण करता है और नियुक्ति के लिये पात्र होगे ।

 परन्तु यह और कि कोई अध्यक्ष और सदस्य उस रुप मे ऐसी आयु प्राप्त कर लेने के पश्चात जो केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाये गये नियमो मे विनिर्दिष्ट किये जाये, पद धरण नही करेगा जिसकी उम्र निम्न से अधिक नही होगी ।

1. अध्यक्ष की उम्र 70 वर्ष व 

2. सदस्यो की उम्र 68 वर्ष   

राष्ट्रीय आयोग के अध्यक्षो और सदस्यो के न तो वेतन और भतो और न ही उनकी सेवा के अन्य निबन्धनो और शर्तो मे उनकी नियुक्ति के प्श्चात उनके अलाभकारी रुप परिवर्तन रुप मे परिवर्तन किया जायेगा ।

राष्ट्रीय आयोग के अन्य अधिकारी और कर्मचारी (धारा 57) उपभोक्ता सरक्षण अधिनियम 2019 की (धारा 57) के अनुसार (1) केन्द्रीय सरकार राष्ट्रीय आयोग के अध्यक्ष के परार्मर्श से राष्ट्रीय आयोग की उसके कृत्यों के निर्वाहन मे सहायता करने के लिये ऐसे अधिकारीयो की ऐसी संख्या का उपलबन्ध करेगी, जो वह ठीक समझे ।

राष्ट्रीय आयोग के अधिकारी और कर्मचारी राष्ट्रीय आयोग के अध्यक्ष के साधरण अधीक्ष्ण मे अपने कृत्यो का निर्वाहन करेगे ।

राष्ट्रीय आयोग के अधिकारी और अन्य कर्मचारी को संदेय वेतन तथा भत्ते तथा सेवा के अन्य निबन्धन और शर्ते वे होगी जो विहीत की जाये ।

राष्ट्रीय आयोग के क्षेत्राधिकारिता उपभोक्ता सरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 58 के अन्र्तगत राष्ट्रीय आयोग को निम्न लिखित अधिकारिता होगी -

1. प्रारभिक अधिकारिता

2. अपीलीय अधिकारिता

3. पुनरीक्षण अधिकारिता


  1. प्रारभिक अधिकारिता ऐसे परिवादो को ग्रहण करना जहंा माल या सेवाओ का मुल्य अथवा दासा प्रतिकर, दस करोड से अधिक है ।
        परन्तु जहां केन्द्रीय सरकार ऐसा करना आवश्यक समक्षती है वहां ऐसा अन्य मुन्य विहीत कर सकेगी जो वह ठीक समझे ।
  1. अनुचित सविदाओ के विरु़ö परिवाद जहां प्रतिफल के रुप मे संदत्त माल या सेवाओ का मुल्य दस करोड रुपये से अधिक है ।


2. अपीलीय अधिकारिता - किसी राज्य आयोग के आदेशो के विरुö अपील ग्रहण करना 

केन्द्रीय प्राधिकारी के आदेशो के विरुö अपील ग्रहण करना ।

अपील करने की सीमा अवधि 30 दिनो तक की अवधि के भीतर करेगा । आयोग के आदेशो की प्रतिया दोनो पक्षो को निःशुल्क भेजी जायेगी ।

3. पुनरीक्षण सम्बन्धी अधिकारिता सम्बन्धी अधिकारिता यदि राष्ट्रीय आयोग ने किसी अधिकारिता का प्रयोग किया है जो विधि द्वारा उसमे विहीत नही है या जो ऐसी अधिकारिता का प्रयोग करने मे असफल रहता है या अपनी अधिकारिता का प्रयोग अवैध रुप से या तात्विक अनियमिता से किया है तो वह ऐसे उपभेक्ता को मंगाना और समुचित आदेश पारित करना ।

जनरल मोर्टस ( इण्डिया) प्रा. लि. बनाम अशोक रमणिक लाल ( 2015) 1 एस. सी. सी. 429 के अनुसार उस दशा मे जहां कि दण्डात्मक प्रतिकर हेतु दावा न तो मुल वादपत्र मे न राज्य अधिकारिण के के समक्ष और न ही राष्ट्रीय आयोग के समक्ष किया गया हो, वहां राष्ट्रीय आयोग द्वारा अपनी पुनरीक्षण अधिकारिता के आधीन दण्डात्मक प्रतिकर प्रदान किया जाना अनुज्ञेय नही है ।

राष्ट्रीय आयोग से उच्चतम न्यायालय से अपील (धारा 67) राष्ट्रीय आयोग के द्वारा पारित किसी आदेश से व्याथित कोई व्यक्ति 30 दिनो की अवधि के प्श्चात भी अील ग्रहण कर सकता है { धारा 21 (क) (1)} परन्तु उच्चतम न्यायालय 30 दिनो की अवधि के प्श्चात भी अपील ग्रहण कर सकता है यदि उसका समाधान हो जाता है कि अपील विलम्ब से फाइल करने का पर्याप्त कारण था किन्तु ऐसा व्यक्ति जो राष्ट्रीय आयोग के किसी आदेश के तहत किसी धनराशि के भुगतान करने के दायित्वाधीन भी है उसकी अपील को उच्चतम न्यायालय तब तक ग्रहण नही करेगा जब तक उक्त धनराीश का 50 प्रतिशत या 50000 रु जो भी कम हो विहीत रीति से जमा न कर दिया हो ।

आदेश की अन्तिमता (धारा 68) जिला आयोग, राज्य आयोग या राष्ट्रीय आयोग के आदेश के विरुध कोई अपील नही की गयी है तो उसका निणर्य अन्तिम होगा ।

परसीमा अवधि (धारा 69) जिला आयोग, राज्य आयोग या राष्ट्रीय आयोग किसी भी वाद को ग्रहण नही करेगे यदिर वह वाद कारण उत्पन्न होने के दिन से 2 वर्ष के अन्दर प्रस्तुत नही किया जाता है । इस प्रकार उपभोक्ता अधिनियम के आधीन किसी परिवाद को प्रस्तुत करने की परिसीमा अवधि दो वर्ष है । इसके पश्चात परिवाद प्रस्तुत नही किया जा सकता है ।

किन्तु उक्त अवधि के बीतने के पश्चात भी परिवाद ग्रहण किया जा सकता है यदि परिवादी उक्त अवधि के भीतर परिवाद फाइल न कर पाने का पर्याप्त सबूत व समुचित कारण है । 


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