सुप्रीम कोर्ट के दो अहम फैसले: परीक्षा के किसी भी फेज में कोई छूट या रियायत ली:अनारक्षित सीट के हकदार नहीं

 - राजस्थान केस: आरक्षित श्रेणी सामान्य कट-ऑफ से अधिक अंक लाता है, तो जनरल कैटेगरी में

- कर्नाटक केस उम्मीदवार चयन प्रक्रिया में आरक्षण का लाभ अनारक्षित सीटों पर समायोजित नहीं
- उम्मीदवार तभी अनारक्षित सीटों पर जब उन्होंने किसी प्रकार का आरक्षण लाभ नहीं लिया हो।
- प्रभाव सभी उम्मीदवारों पर जिससे मेरिट आधारित चयन में पारदर्शिता और निष्पक्षता बढ़ेगी।

कानपुर 18 जनवरी 2026
नई दिल्ली: 18 जनवरी 2026
सुप्रीम कोर्ट ने दो महत्वपूर्ण फैसले सुनाए हैं जो आरक्षण और सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के अधिकारों को स्पष्ट करते हैं। पहला निर्णय राजस्थान हाई कोर्ट केस में आया, जिसमें कहा गया कि ओपन/जनरल कैटेगरी मेरिट पर आधारित है और आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार यदि सामान्य कट-ऑफ से अधिक अंक लाते हैं, तो उन्हें जनरल कैटेगरी में माना जाएगा। दूसरा निर्णय कर्नाटक केस में आया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले को पलटते हुए कहा कि यदि कोई उम्मीदवार चयन प्रक्रिया के किसी चरण में आरक्षण का लाभ लेता है, तो वह अनारक्षित सीटों पर समायोजित नहीं किया जा सकता। इस निर्णय से यह स्पष्ट हुआ कि आरक्षित उम्मीदवार केवल तभी अनारक्षित सीटों पर गिने जाएंगे जब उन्होंने कोई आरक्षण लाभ नहीं लिया हो। इससे प्रतियोगी परीक्षाओं में मेरिट को प्राथमिकता मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने एक विशेष मामले में भी फैसला दिया, जहां एक एससी उम्मीदवार ने आरक्षण का लाभ उठाकर बेहतर रैंक हासिल की, लेकिन अनारक्षित सीट के लिए पात्र नहीं ठहराए गए। इस प्रकार, यह निर्णय आरक्षण और सामान्य श्रेणी के बीच स्पष्टता प्रदान करता है और भविष्य में विवादों को कम करेगा।


⚖️ सुप्रीम कोर्ट के दो अहम फैसले

1. राजस्थान हाई कोर्ट केस (19 दिसंबर, 2025)

  • निर्णय: ओपन/जनरल कैटेगरी का मतलब है खुला—यह जाति, वर्ग या लिंग से परे केवल मेरिट पर आधारित है।
  • मुख्य बिंदु:
    • यदि कोई आरक्षित श्रेणी का उम्मीदवार बिना किसी छूट का लाभ उठाए सामान्य कट-ऑफ से अधिक अंक लाता है, तो उसे जनरल कैटेगरी में गिना जाएगा।
    • आवेदन पत्र में आरक्षित श्रेणी का उल्लेख करने मात्र से उम्मीदवार केवल आरक्षित पदों तक सीमित नहीं हो जाता।

2. कर्नाटक केस (6 जनवरी, 2026)

  • निर्णय: यदि कोई उम्मीदवार चयन प्रक्रिया के किसी भी चरण में आरक्षण का लाभ लेता है (जैसे आयु सीमा में छूट, फीस में छूट, प्रारंभिक परीक्षा में आरक्षण), तो उसे बाद में अनारक्षित सीटों पर समायोजित नहीं किया जा सकता—even अगर वह सामान्य कट-ऑफ से अधिक अंक लाए।
  • मुख्य बिंदु:
    • सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाई कोर्ट का फैसला पलट दिया।
    • स्पष्ट किया कि आरक्षित उम्मीदवार केवल तभी अनारक्षित सीटों पर गिने जाएंगे जब उन्होंने किसी भी प्रकार का आरक्षण लाभ न लिया हो।

👥 विभिन्न श्रेणियों पर असर

श्रेणीअसर
SC/ST/OBC (आरक्षित)- यदि बिना किसी छूट का लाभ उठाए मेरिट से चयनित होते हैं, तो जनरल कैटेगरी में गिने जाएंगे। <br> - यदि किसी भी चरण में आरक्षण का लाभ लिया है, तो केवल आरक्षित सीटों पर ही पात्र होंगे।
जनरल कैटेगरी (Unreserved)- ओपन कैटेगरी पूरी तरह मेरिट आधारित है। <br> - इससे प्रतियोगी परीक्षाओं और नौकरियों में पारदर्शिता और निष्पक्षता बढ़ेगी।
सभी उम्मीदवार- मेरिट को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। <br> - आरक्षण का लाभ लेने और न लेने की स्थिति अब स्पष्ट रूप से परिभाषित है।

📌 कानूनी सिद्धांत और भविष्य पर असर

  • समानता और पारदर्शिता: यह सुनिश्चित करता है कि आरक्षित उम्मीदवारों को भी समान अवसर मिले, लेकिन अनारक्षित सीटों पर केवल वही गिने जाएं जिन्होंने कोई छूट नहीं ली।
  • मेरिट आधारित चयन: प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं में मेरिट को और मजबूत किया गया है।
  • न्यायिक संतुलन: इससे भविष्य में आरक्षण और सामान्य श्रेणी के बीच विवादों में स्पष्टता आएगी।


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